[गांधीनगर – विशेष रिपोर्ट, ‘महानगर मेट्रो’]
आज का दिन गुजरात के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया है। लंबी चर्चाओं, कानूनी जद्दोजहद और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल की सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) बिल विधानसभा में पारित कर राज्य में एक नए युग की शुरुआत की है। यह निर्णय केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि राज्य की प्रत्येक बहन, बेटी और माता के सम्मान और सुरक्षा की विजय है।
सदन में गूंजी न्याय की गूंज
मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने सदन में इस बिल को पेश करते हुए कहा, “विकसित गुजरात के निर्माण में सामाजिक समानता अनिवार्य है। हमारे संविधान निर्माताओं का जो सपना था, उसे आज हम गुजरात की धरती पर साकार कर रहे हैं।” इस बिल के पास होते ही विधानसभा सदन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
क्यों यह दिन ‘स्वर्णिम’ है? – आदिशक्ति के अधिकारों की रक्षा
UCC लागू होने से गुजरात की महिलाओं को कई मोर्चों पर न्याय मिलेगा:
- उत्तराधिकार का अधिकार: पिता या पति की संपत्ति में बेटियों और पत्नियों को समान अधिकार प्राप्त होगा।
- विवाह और तलाक: सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह पंजीकरण और तलाक के नियम एक समान होंगे, जिससे शोषण रुकेगा।
- गोद लेना (Adoption): संतान गोद लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका अधिक मजबूत और स्पष्ट होगी।
- भरण-पोषण: तलाक के मामलों में महिलाओं को मिलने वाले गुजारा भत्ता (maintenance) के अधिकार अधिक सुरक्षित होंगे।
वोट बैंक नहीं, ‘विकास’ और ‘न्याय’ की राजनीति
विपक्ष के हंगामे और कई राजनीतिक बाधाओं के बावजूद सरकार ने दृढ़ता दिखाई है। ‘पाक्को गुजरात’ के साथ बातचीत में राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि इस बिल को पारित करके गुजरात सरकार ने साबित कर दिया है कि वे तुष्टीकरण में नहीं बल्कि ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ में विश्वास रखते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की महिलाएं, जो अब तक जटिल सामाजिक कानूनों में फंसी हुई थीं, उन्हें अब कानून का सीधा संरक्षण मिलेगा।
“गुजरात की नारी शक्ति के सशक्तिकरण के लिए यह कानून एक मजबूत आधार साबित होगा। अब कोई बेटी अन्याय का शिकार नहीं होगी।”
— मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल‘पाक्को गुजरात’ का जनता से सवाल
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